क्या है धारा 188? प्रधानमंत्री मोदी द्वारा घोषित लॉकडाउन से क्या है संबंध ?


नई दिल्ली,   धारा 188 क्या हैं  और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित लॉकडाउन से इसका क्या संबंध है ?  इन सभी सवालों का जवाब जानना आपके लिये जरूरी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 24 मार्च 2020 की रात 12 बजे से लॉकडाउन लागू होने की घोषणा की थी।



इसके साथ ही पूरे देश में धारा 188 भी लागू हो गई है।


 

कोरोनावयारस से लड़ने के लिए लॉकडाउन की घोषणा महामारी कानून ( Epidemic Diseases Act, 1897) के तहत लागू किया गया है।

 

इसी कानून में प्रावधान किया गया है कि अगर लॉकडाउन में सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों का कोई व्यक्ति उल्लंघन करता है,

 

तो उस पर भारतीय दंड संहिता (IPC - Indian Penal Code) की धारा 188 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 IPC Secion 188-


1897 के महामारी कानून (Mahamari Act) के सेक्शन 3 में इस बात का जिक्र किया गया है कि अगर कोई प्रावधानों का उल्लंघन करता है, सरकार / कानून के निर्देशों / नियमों को तोड़ता है, तो उसे आईपीसी की धारा 188 के तहत दंडित किया जा सकता है। आपके खिलाफ ये धारा किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा दिए निर्देशों का आप द्वारा उल्लंघन करने पर भी  लगाई जा सकती है।


किसी के ऊपर ये धारा लगाने व कानूनी कार्रवाई करने के लिए ये भी जरूरी नहीं कि उसके द्वारा नियम तोड़े जाने से किसी का नुकसान हुआ हो या नुकसान हो सकता हो। अगर आपको सरकार द्वारा जारी उन निर्देशों की जानकारी है, फिर भी आप उनका उल्लंघन कर रहे हैं, तो भी आपके ऊपर धारा 188 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।


IPC की धारा 188 के तहत सजा के दो प्राविधान हैं-



1- आईपीसी की धारा 188 यानी सरकारी आदेश के उल्लंघन के मामले में अधिकतम एक महीने की कैद या फिर 200 रुपये जुर्माना है या फिर दोनों है।


2- लेकिन अगर सरकारी आदेश के उल्लंघन के कारण किसी की जान खतरे में पड़ती है तो छह महीने तक जेल की सजा हो सकती है या फिर एक हजार रुपये तक जुर्माना हो सकता है या फिर दोनों हो सकता है।


कानूनी प्राविधानों के अनुसार लोक सेवक या सरकारी अधिकारी को अदालत के सम्मुख लॉकडाउन के उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज करानी होगी, लेकिन किसी भी स्थिति में पुलिस द्वारा धारा 188 के तहत प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती।


क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC 1973) के पहले शेड्यूल के अनुसार, दोनों ही स्थिति में जमानत मिल सकती है और कार्रवाई किसी भी

मजिस्ट्रेट द्वारा की जा सकती है।