जगदगुरू शंकराचार्य ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर जताई ये आपत्ति ?




मथुरा, गोवर्धन पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य अधोक्षजानन्द देव तीर्थ ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर बद्रीनाथ धाम के पट खोलने की तिथि में किये गए परिवर्तन पर आपत्ति जताई है।



गोवर्धन पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य अधोक्षजानन्द देव तीर्थ ने शुक्रवार को यहां कहा कि आदि देव बद्र्रीनाथ के पट खुलने की तिथि में इस प्रकार परिवर्तन किया गया है जैसे किसी घर के धार्मिक कार्यक्रम में परिवर्तन किया जाता है जबकि भगवान विष्णु की कृपा का अनुभव पूरी श्रद्धा से पूजा करके आज भी किया जा सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बद्रीनाथ धाम के पट खोलने की तिथि में परिवर्तन न किये जाने के लिये पत्र लिखा है।



उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए केन्द्र और राज्यों की सरकारों ने सराहनीय प्रयास किया है। कारण कुछ भी हो पर अपेक्षित परिणाम सामने नही आ पा रहे है। अब तक किसी वैक्सीन के न निकलने तथा इस महामारी के इलाज का कोई सही तरीका न मिलने के कारण यदि देश के किसी भाग में कुछ मरीज ठीक हो रहे हैं तो नये मरीजों के संक्रमण का सिलसिला नही रूक पा रहा है। ऐसे में पूरी निष्ठा से की गई भगवत आराधना प्रभावकारी सिद्ध हो सकती है।



शंकराचार्य ने कहा कि देश के प्रमुख तीर्थ बद्रीनाथ के पट खोलने में जो प्रक्रिया उत्तराखण्ड सरकार द्वारा इस वर्ष अपनाई गई है वह न तो परंपरागत है और ना ही धर्मसंगत है। आदि शंकराचार्य के तप के कारण उन्हें बद्रीनाथ भगवान की मूर्ति अलकनन्दा नदी में मिली थी जिसे बाद में मंदिर का स्वरूप दिया गया था। उनके द्वारा प्रतिपादित परंपरा के अनुसार ही बद्रीनाथ धाम के पट खोलने की परंपरा सदियों से चलती आ रही है। उत्तराखण्ड की सरकार ने इस वर्ष पहले तो बद्रीनाथ धाम के पट खोलने की तिथि की घोषणा कर दी और बाद में पट खुलने के समय आनलाइन पूजा के विधान की घोषणा कर दी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने बद्रीनाथ धाम के पट खुलने की तिथियों में भी परिवर्तन कर दिया गया है जो समझ से इसलिए भी परे है। यह परिवर्तन त्रिवेन्द्र सिह रावत जैसे धार्मिक मुख्यमंत्री के राज्य में हो रहा है।
गोवर्धन पीठाधीश्वर ने कहा कि बद्रीनाथ धाम के पट खुलने की शास्त्र संवत तिथि में जिस प्रकार से परिवर्तन किया गया है उससे आदि देव के कोप की आशंका होने लगी है। कुछ वर्ष पूर्व केदारनाथ धाम की त्रासदी देशवासियों को इसलिए झेलनी पड़ी थी। उत्तराखण्ड सरकारों की निस्क्रियता के कारण लोगों ने केदारनाथ धाम को पिकनिक स्पाट बना दिया था।
कोरोना वायरस महामारी से लड़ाई में प्रधानमंत्री की सफलता की कामना करने हुए शंकराचार्य ने पत्र में कहा कि वे स्वयं प्रज्ञावान है और जानते हैं कि भगवान के कोप में प्रलय तक हो जाती है। ऐसे में बद्रीनाथ धाम के पट पूर्व निर्धारित तिथि पर ही खोलना उचित होगा। जहां तक रावल के लाने का सवाल है उसकी व्यवस्था सेना के हेलीकाॅप्टर से की जा सकती है। पूजन प्रक्रिया पूरी होने के बाद रावल आदि को दो या तीन हफ्ते के क्वारंटाइन में बद्रीनाथ धाम में रखा जा सकता है। बद्रीनाथ धाम की पूजन प्रक्रिया मंदिर के अन्दर उसी प्रकार से चल सकती है जैसे देश के अन्य भागों के मंदिरों में हो रही है । लाॅकडाउन के दौरान मंदिर में तीर्थयात्रियों का प्रवेश निषेध किया जा सकता है।