शीर्ष उलेमा ने कहा, पोलियो की खुराक शरीयत के खिलाफ नहीं

इस्लामाबाद,  पाकिस्तान में शीर्ष उलेमा के एक संगठन ने लोगों से देशव्यापी पोलियो उन्मूलन अभियान को सफल बनाने का अनुरोध करते हुए कहा है कि पोलियो की खुराक शरीयत के खिलाफ नहीं है। पाकिस्तान में 2019 में पोलियो के 144 मामले सामने आए थे। देश ने सोमवार से अपने यहां पांच साल से कम उम्र के 3.96 करोड़ बच्चों को पोलियो का टीका लगाने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया है।
देश में पोलियो उन्मूलन के लिए 1994 से प्रयास किए जा रहे हैं।


बहरहाल, हालिया वर्षों में चरमपंथियों ने पोलियो टीकाकरण दलों को निशाना बनाया जिसकी वजह से पोलियो उन्मूलन के प्रयास बाधित हुए। चरमपंथी पोलियो अभियान का विरोध करते हुए दावा करते हैं कि इसकी दवा से प्रजननशक्ति खत्म होती है। डॉन समाचार पत्र ने पाकिस्तान उलेमा काउंसिल के अध्यक्ष ताहिर अशरफी को यह कहते हुए उद्धृत किया है ‘‘पाकिस्तान उलेमा काउंसिल, दारुल अफ्ता पाकिस्तान, वफाक-उल-मस्जिद, मदारिस-ऐ-पाकिस्तान और प्रमुख एलेमा तथा मशाएख पहले ही कह चुके हैं कि पोलियो की खुराक न केवल हलाल हैं बल्कि मानव के लिए फायदेमंद हैं। इस संबंध में आदेश जारी किया जा चुका है कि पोलियो की खुराक न तो नुकसानदायक हैं और न ही इन्हें लेना हराम है।’’


अशरफी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में उलेमा और मजहबी शोधार्थियों से पोलियो अभियान को सफल बनाने तथा जुमे की नमाज में यह पैगाम देने को कहा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान को छोड़ कर सभी देशों से पोलियो खत्म हो चुका है। अशरफी ने कहा ‘‘हमें यह समझने की जरूरत है कि इस्लामी जगत के वरिष्ठ उलेमा और मजहबी शोधार्थियों ने व्यवस्था दी है कि पोलियो के टीके में शरीयत के खिलाफ कुछ भी नहीं है।’’